WHAT IS INTERNET ? HOW TO INCREASE GENERATION BY INTERNET

WHAT IS INTERNET ?  

आज के इस जमाने में इंटरनेट काफी ज्यादा एक पॉपुलर RESOURCE बन गया है। जिसके इस्तेमाल करने पर आज सारी दुनिया चल रही है। 

इंटरनेट का इस्तेमाल BANKING, SCHOOL, BULDING, ORGANIZATION AND INFORMATION TECHOLOGY COMPANY, COMPUTER SCIENCE, AIRPORT, INSISTUTE, RAILWAY, HOSPITAL, GAS AGENCY, BLOGGING, AND WORK AT HOME ETC के लिए किया जा रहा हैं।

इंटरनेट आज दुनिया का सबसे बड़ा RESOURCE बन गया है। इंटरनेट की दुनिया में बहुत प्रचलित है। भारत में इंटरनेट का सबसे पहली बार 15 AUGUST 1995 में लांच किया गया था। 

इंटरनेट की दुनिया आज बड़ी हो गई। जो लोगों को हर कदम कदम तक साथ दे रही है। इंटरनेट का आविष्कार 1 JANUARY 1983 के दुनिया में सबसे पहली बार किया गया था। 

इंटरनेट की शुरुआत  1ST GENERATION से होना शुरू हो गयी थी। अब मैं आपको बताऊंगा 1ST GENERATION, 2ND GENERATION, 3RD GENERATION, 4TH GENERATION, 5TH  GENERATION क्या होता है। 

पहले की मुताबिक  इस समय इंटरनेट कैसे चलता था।  कितना इंटरनेट डेवेलोप हो गया है।  सारी जानकारियां एक एक करके मै बताऊंगा। 



1ST GENERATION 



1ST GENERATION में सिर्फ कॉलिंग और बातचीत करने के लिए ही सुविधा मिलता था।  इसमें  आपके घर पर LAND LINE MOBILE रखा हुआ होता था। बहुत सारे लोगों LAND LINE MOBILE देखा होगा। 

मान लो आपके घर पर एक लैंडलाइन मोबाइल रखा हुआ है। और आप बेंगलुरु में रहते हैं अगर आपको दिल्ली में किसी इंसान से बात करना होगा। 

तब अपनी बैंगलोर से कॉल लगाया और वह कॉलिंग आपकी टेलीफोन बूट में, आपके शहर में या जिला में सभी के पास टेलीफोन बूट होता था। 

जिसमे आपके के सभी LAND LINE CONNECTION जुड़ा होता था। 

टेलीफोन बूट एक डिब्बा की तरह होता है।  टेलीफोन बूट मैं बहुत सारे तार  जुड़े हुए होता था। सभी वायर टेलीफोन बूट से टेलीफ़ोन एक्सचेंज तक कनेक्ट रहता था। टेलीफ़ोन एक्सचेंज  में होता था। 


जैसे ही आपका कॉल का सिंगल मिला तो वह पर बैठे लोग मैन्युअली आपके बैंगलोर का वायर उठा कर दिल्ली के टेलीफ़ोन एक्सचेंज में लगा देते थे। 

फिर यह सिग्नल दिल्ली में जाता था और दिल्ली में भी  जिस इंसान के पास कॉल करना चाहते हैं। 

उस इंसान के एरिया में भी टेलीफोन बूट वाला बॉक्स होता था फिर उस बोग्ज़ से दिल्ली में बैठे हुए जिस इंसान के पास कॉल करना चाहते थे। उसके  घर मे बात होती थी। 

1ST GENERATION के दौरान मोबाइल भी आया लेकिन उसमे भी सिर्फ कालिंग की सुविधा थी। 1ST GENERATION  1982 में आया था।

 जो G.S.M द्वारा डेवेलोप किया गया था। इसे  GROUP  SPECIAL MODULE. भी कहा जाता है। 

जब यह पूरी दुनिया में प्रसारित होने लगा तब इसको GLOBAL SYSTEM OF TELICOMMUNICATION MODULE  कहा जाने लगा। 

1G का स्पीड 24 Kbps थी।


2ND GENERATION


1ST GENERATION  और 2ND GENERATION में  यही अंतर है। 1G में सिर्फ एक ही फ्यूचर होता था कॉलिंग। 2G में  दो  फ्यूचर होता था CALLING और MESSAGING . 

2ND GENERATION यानि की 2G  को 1992 में रिलीज़ किया गया था। 2G का स्पीड 64 Kbps थी। इस समय लोग सोचते थे।  

कितने कम इंटरनेट स्पीड को बहुत ज्यादा आती है उनके लिए यह काफी ज्यादा थी। लेकिन अगर आज ऐसा स्पीड इंटरनेट देने लगे तो लोग  मोबाइल तोड़ कर फेकना शुरू कर देंगे।

 2G को CDMA  भी कहा जाता था।  CDMA का मतलब होता है। CODE - DIVISION- MULTIPLE ACCESS2G को QUALCOMM द्वारा डेवेलोप किया गया था। 


2.5 GENERATION



2.5 GENERATION में लोगो को तीन FEATURE देखने को मिलने लगा। जैसे CALLING , MESSAGING, AND INTERNET. उस समय भी इंटरनेट की स्पीड 64 Kbps थी। 

इंटरनेट में उस समय कुछ भी सुधार नहीं हो रहा है। 2.5 GENERATION को GPRS भी कहा जाता था।  GPRS  का मतलब होता है। 

GENERAL - PACKET - RADIO SERVICES . उस समय लोग मैसेज करना शुरू कर दिया था। 

एयरटेल का सिम में  मैसेज करना काफी आसान हुआ था।  इसमें कुछ रुपए का पैकेट रिचार्ज होता था। 




2.75 GENERATION


2.75 GENERATION में EDGE होता था। जिसको ENHANCED DATA RATES FOR GSM EVOLUTION कहते थे। हमलोग धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी आगे की तरफ विकशित कर रहे थे। 

2.75 GENERATION में इंटरनेट की स्पीड बढ़ कर 170 Kbps हो गयी थी। 

आप भी कभी 2G  मोबाइल इस्तेमाल क्या हुआ तो आपने इंटरनेट खोलते समय पर नहीं देखा होगा कि उसमें लिखा है - G, G+, उस समय अगर आपने मोबाइल का इंटरनेट खोला है 

और G+ ऊपर में नहीं दिख रहा है तो आपका इंटरनेट नहीं चलता था। 

3RD GENERATION 


3G को 2001 में LAUNCH किया गया था। 3G का खास बात यह थी कि हमें वीडियो कॉलिंग का करना शुरू हो गया था। और 3G  में इंटरनेट की स्पीड बढ़ गई थी। 

3G  में इंटरनेट की स्पीड 384 Kbps हो गयी थी। पहले के मुताबिक इंटरनेट का स्पीड दोगुना हो गई थी। 


3.5 RD  GENERATION 


3.5 G में पहली बार HSDPA AND HSUPA SYSTEM आ गया था। HSDPA का मतलब HIGH SPEED DOWNLINK PACKET ACCESS और HSUPA का मतलब HIGH  SPEED UPLINK  PACKET  ACCESS. 

अगर हमें सीधे भाषा में बोले तो DOWNLOAD  AND  UPLOAD  SPEED 2Mbps हो गया था। 

1Mbps = 1024 Kbps 

3.75  GENERATION 


3.75 G में पहली बार HSDPA + आ गया था। HSDPA + का मतलब  HIGH SPEED DOWNLINK PACKET ACCESS PLUS. 

3.75 G में जब भी आप मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करना चाहते थे। और अपना मोबाइल का इंटरनेट खोलते ही जहां पर नेटवर्क दिखता है उ

सके बगल में H OR H+ SYMBOL होता था। H+ SYMBOL होने पर हमारा मोबाइल इंटरनेट तेजी से चलता था। 

अब आप सोच रहे हैं कि 4जी जेनरेशन आ गया लेकिन आपको यह  सोचना गलत है। क्योंकि इसके बाद यह आया था। 




3.9 GENERATION 


3.9G भी इसमें हमने पहली बार LTE को देखा। हम लोग कहते हैं कि 4G के साथ LTE आया था। लेकिन नहीं 3.9G में ही LTE को लाया गया था। 

LTE का मतलब LONG- TERMS- EVOLUTION  अब आपके मोबाइल में 4G आ गया था। 

4TH  GENERATION 


4 GENERATION जिसमे 4G को लाया गया था। पहले के मुताबिक 4G में कोई अंतर नहीं था। इसमें सिर्फ INTERNET SPEED बहुत बहुत ज्यादा बढ़ गया था।  4G INTERNET SPEED  की बात करे तो 100 Mbps हो गया है। 

4G STATIONARY USERS के लिए  1 Gbps तक इंटरनेट स्पीड दे सकता है। लेकिन अगर आप MOVING USERS हो तो आपको 100Mbps तक स्पीड दे सकता है। 

STATIONARY USERS का मतलब कि एक स्थान पर बैठकर इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं। MOVING USERS का मतलब आप ट्रेन या किसी गाड़ी में बैठ कर यात्रा कर रहे हैं।  तो 100Mbps तक स्पीड दे सकता है।


 5 TH GENERATION 


5G लगभग पूरी दुनिया में आ गई है। लेकिन इंडिया में अभी कोरोना के वजह से देरी हो रही है। बहुत सरे कंपनी 5G मोबाइल फोन भी लॉन्च कर दिया है। 5G का मतलब ही होता है। 

5Gbps की स्पीड से आप डाउनलोड और अपलोड कर पाएंगे। हाई स्पीड वीडियो कॉलिंग, नॉर्मल कॉलिंग, और हाई स्पीड इंटरनेट इस्तेमाल कर पाएंगे। 4G मैं भी हम लोग कुछ चीजों को नहीं कर पा रहे थे। 

5G आने के बाद आप चाहे तो अपने अनुसार कार को कंट्रोल कर सकते हैं गाड़ी को आराम से चला सकते हैं। किसी दूसरे डिवाइस में भी कनेक्ट कर सकते हैं। जो हमें पहले देखने को नहीं मिलता था। 





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